दून में साहित्यिक महोत्सव: अपराध, सिनेमा और समाज पर देशभर के दिग्गजों का मंथन
दून में साहित्य और संवाद का संगम: अपराध, सिनेमा और समाज पर गहन विमर्श
देहरादून।
दून कल्चरल एंड लिटरेरी सोसाइटी (DCLS) द्वारा आयोजित साहित्यिक महोत्सव में अपराध, न्याय, सिनेमा और समाज से जुड़े विविध विषयों पर गंभीर और विचारोत्तेजक संवाद देखने को मिले। महोत्सव के विभिन्न सत्रों में लेखकों, पुलिस अधिकारियों, फिल्मकारों और पत्रकारों ने अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा किए।
“बिल्डर्स, ब्रोकर्स एंड बिट्रेयलस” सत्र में बंसीधर तिवारी और एसएसपी अजय सिंह ने रियल एस्टेट में हो रही धोखाधड़ी, नियामक खामियों और नागरिक जागरूकता की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं “उत्तराखंड राइजिंग: इंडिया’s न्यू सिनेमेटिक कैपिटल” सत्र में केतन मेहता, अनुरित्ता के. झा और बंसीधर तिवारी ने आर.जे. काव्या के साथ संवाद करते हुए उत्तराखंड में फिल्म निर्माण, कहानी कहने की परंपरा और राज्य की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की।
समानांतर सत्रों में “सिंस, सीक्रेट्स एंड सुपरहीरोज़” के दौरान रंजन सेन ने कहा कि अपराध कथा तभी प्रभावशाली बनती है जब लेखक अपराधियों की मानसिकता को गहराई से समझते हैं। विनय कंचन ने कानून और न्याय के बीच मौजूद ग्रे स्पेस को सशक्त कहानी कहने का आधार बताया, जबकि सुहैल माथुर ने कहा कि अपराध और नैतिक अस्पष्टता की जड़ें प्राचीन पौराणिक कथाओं तक जाती हैं।
“डेंजर इन द डीएम्स” सत्र में अनिर्बन भट्टाचार्य ने सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स में छिपे खतरों को लेकर आगाह किया। वहीं जुपिंदरजीत सिंह ने कहा कि भारत में प्राकृतिक न्याय की खोज कई बार कानूनी प्रक्रिया से ऊपर मानी जाती है और गैर-कथा अपराध लेखन भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ टीवी की चमक-दमक से काफी दूर होता है।
“इटारसी एक्सप्रेस – अ राइड थ्रू मिस्ट्री” सत्र में लेखक विवेक दुग्गल ने बताया कि उनकी कहानियां वास्तविक घटनाओं और कल्पना का मिश्रण होती हैं, जिससे पाठक हर भावना को महसूस कर पाते हैं और पूरी कहानी से जुड़े रहते हैं।
अन्य सत्रों में “दिल्ली डिस्को: मिस्चीफ, मर्डर एंड मेहम ऑन द डांस फ्लोर” में लेखक शिखर गोयल और सुप्रिया चंदोक शामिल हुए। “क्राइम, पावर एंड पब्लिक ट्रस्ट” सत्र में पूर्व दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने पुलिसिंग, साइबर अपराध, आतंकवाद और कानूनी सुधारों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने निर्भया मामला, 1993 मुंबई ब्लास्ट, दाऊद इब्राहिम की जांच और क्रिकेट में भ्रष्टाचार व स्पॉट फिक्सिंग जैसे मामलों पर अपने अनुभव रखे।
इसके बाद “द लाइर अमंग अस” सत्र में कहानीकार विशाल पॉल ने प्रियाक्षी राजगुरु गोस्वामी के साथ संवाद किया। वहीं जुपिंदरजीत सिंह द्वारा आयोजित क्राइम रिपोर्टिंग कार्यशाला में प्रतिभागियों को अपराध पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला।
दून कल्चरल एंड लिटरेरी सोसाइटी द्वारा आयोजित यह महोत्सव देहरादून को अपराध, न्याय और समाज पर सार्थक संवाद के एक प्रमुख मंच के रूप में स्थापित करता है। महोत्सव का अंतिम दिन साइबर अपराध, खुफिया संचालन और आधुनिक पुलिसिंग में नैतिक चुनौतियों पर केंद्रित रहेगा।
