उत्तराखंडदेहरादून

विजय दिवस 2025: शौर्य स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

 

विजय दिवस 2025: शौर्य स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

1971 के युद्ध की 54वीं वर्षगांठ पर उत्तराखंड सब एरिया मुख्यालय में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि समारोह

देहरादून।

विजय दिवस 2025 के अवसर पर 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध की 54वीं वर्षगांठ को स्मरण करते हुए मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया द्वारा शौर्य स्थल पर पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), राज्यपाल उत्तराखंड, मेजर जनरल एम.पी.एस. गिल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, उत्तराखंड सब एरिया, मेजर जनरल रोहन आनंद, अतिरिक्त महानिदेशक, एनसीसी उत्तराखंड निदेशालय, ग्रुप कैप्टन ऋषभ शर्मा, रियर एडमिरल पीयूष पौसी, संयुक्त चीफ हाइड्रोग्राफर, एनएचओ देहरादून सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

समारोह में देहरादून स्टेशन के सेवारत अधिकारी, जूनियर कमीशंड ऑफिसर और अन्य रैंक के जवान भी उपस्थित रहे। सभी ने देश की रक्षा में अपने कर्तव्यों का निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करने का संकल्प लिया।

 

इस अवसर पर राज्यपाल ने सेवारत एवं पूर्व सैनिकों से भेंट कर संवाद किया और राष्ट्र की सुरक्षा में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की। उन्होंने 1971 के भारत–पाक युद्ध को भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि इस युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्वितीय शौर्य, साहस और उत्कृष्ट रणनीति का परिचय देते हुए दुश्मन के लगभग 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया। इस ऐतिहासिक विजय ने न केवल पाकिस्तान के विभाजन को जन्म दिया, बल्कि बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त किया।

 

राज्यपाल ने कहा कि सशस्त्र बलों की कठोर प्रशिक्षण प्रणाली, अनुशासन, सटीक योजना और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि 54 वर्ष पूर्व इस युद्ध में शहीद और घायल हुए जवानों के परिवारों की देखभाल करना समाज और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है। विजय दिवस के अवसर पर यह संकल्प लेना चाहिए कि बलिदानियों के परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

 

उन्होंने कहा कि भारत आज सैन्य आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और भविष्य के युद्ध कौशल के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे सशस्त्र बलों की क्षमताएं और राष्ट्रीय सुरक्षा और अधिक मजबूत हो रही हैं।

 

राज्यपाल ने कहा कि विजय दिवस केवल अतीत की विजय को स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और भविष्य के प्रति संकल्प लेने का दिन भी है। उन्होंने कहा कि देश को आंतरिक और बाह्य सुरक्षा चुनौतियों के प्रति हमेशा सजग और सुदृढ़ रहना होगा।

 

1971 के युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक विजय और कर्तव्य पथ पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की स्मृति में हर वर्ष 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाता है। तत्कालीन थल सेना प्रमुख जनरल एस.एफ.जे. मानेकशॉ के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को निर्णायक पराजय दी और बांग्लादेश के रूप में नए राष्ट्र के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। देश अपने उन वीर सपूतों को नमन करता है, जिन्होंने राष्ट्र की अस्मिता और स्वाभिमान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *